मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही अपनी पुलिस की सख्त और प्रोफेशनल छवि पर गर्व करते हों, लेकिन हाल के घटनाक्रम यह दर्शा रहे हैं कि प्रदेश की पुलिस और सत्तारूढ़ दल के नेताओं के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।
बीते 24 घंटों में वाराणसी में यह दूसरा मौका है जब पुलिस और बीजेपी नेताओं के समर्थक आमने-सामने आ गए। पहले मामले में वाराणसी दक्षिण के विधायक सौरभ श्रीवास्तव और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई थी, वहीं अब मंत्री अनिल राजभर के समर्थक भी पुलिस से भिड़ गए।
जानकारी के मुताबिक, शनिवार को प्रधानमंत्री कार्यक्रम के दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच विवाद की शुरुआत मामूली कहासुनी से हुई, लेकिन कुछ ही देर में स्थिति तनावपूर्ण बन गई। दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की की नौबत तक आ गई। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थिति को संभाला, हालांकि इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, समर्थक पुलिस के रवैये से नाराज़ थे और पुलिस पर अनुचित व्यवहार का आरोप लगा रहे थे। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिक जिम्मेदारी है, चाहे मामला किसी का भी हो।
राजनीतिक हलकों में इस घटना ने हलचल मचा दी है। एक तरफ बीजेपी के नेता खुलकर अपने समर्थकों के पक्ष में बोल रहे हैं, वहीं विपक्ष ने इस विवाद को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “जब सत्तारूढ़ दल के नेता ही पुलिस से टकरा रहे हैं, तो आम जनता का भरोसा कानून व्यवस्था पर कैसे रहेगा?”
इन लगातार घटनाओं से यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या पुलिस की सख्त कार्रवाई अब सत्ताधारी दल के नेताओं और समर्थकों को रास नहीं आ रही है? या फिर यह किसी गहरे असंतोष का संकेत है?

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