उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए ने प्रदेशवासियों से सतर्क रहने की सख्त अपील की है। मुख्यमंत्री ने अपनी पाती (पत्र) के माध्यम से स्पष्ट किया है कि देश के किसी भी कानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल, व्हाट्सएप या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। “डिजिटल अरेस्ट” जैसे भ्रामक शब्दों का इस्तेमाल कर साइबर ठग लोगों को डराकर ठगी कर रहे हैं, जिनसे सावधान रहने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर द्वारा साइबर अपराध के खिलाफ लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में ‘डिजिटल अरेस्ट’ पर आधारित एक लघु फिल्म जारी की गई है, जिसे पिछले चार दिनों में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 17 लाख 30 हजार से अधिक लोगों ने देखा और सराहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल 2 साइबर क्राइम थाने थे, जबकि अब के सभी 75 जनपदों में साइबर क्राइम थाने और साइबर हेल्प डेस्क सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि सतर्कता और जागरूकता ही साइबर अपराध के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे अपनी व्यक्तिगत जानकारी, ओटीपी, फोटो, वीडियो और लोकेशन सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें। यदि किसी भी प्रकार का साइबर अपराध हो, तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके।
डिजिटल अरेस्ट पर आधारित इस जागरूकता लघु फिल्म में प्रसिद्ध अभिनेता ने अभिनय किया है। फिल्म को चार दिनों में यूट्यूब पर 10 लाख से अधिक, एक्स (X) पर 1.26 लाख, इंस्टाग्राम पर 42 हजार और फेसबुक पर 20 हजार से अधिक व्यूज मिल चुके हैं। इसके अलावा व्हाट्सएप चैनल और डिजिटल वॉलंटियर ग्रुप्स के माध्यम से भी लाखों लोगों तक यह संदेश पहुंचाया गया है।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि आइए, हम सब मिलकर एक सुरक्षित और साइबर अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश का निर्माण करें।
— रॉयल शाइन टाइम्स

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