भारतीय शिक्षण मंडल, काशी प्रांत एवं सुभद्रा कुमार इंटर कॉलेज, बसनी  के संयुक्त तत्वावधान में भव्य व्यास पूजन कार्यक्रम का आयोजन

बड़ागाँव*

भारतीय शिक्षण मंडल, काशी प्रांत एवं सुभद्रा कुमार इंटर कॉलेज, बसनी, के संयुक्त तत्वावधान में गुरु-शिष्य परंपरा को स्मरण करते हुए व्यास पूजन कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती एवं महर्षि वेदव्यास जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ की गई, जिससे विद्यालय परिसर में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण की सजीव अनुभूति हुई। भारतीय शिक्षण मंडल का ध्येय श्लोक एवं ध्येय वाक्य वाचन का सौभाग्य प्रांत संगठन मंत्री श्री अशोक विश्नोई को प्राप्त हुआ। उन्होंने श्लोक वाचन के माध्यम से संगठन के उद्देश्य व मूल्यों को सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों के समक्ष प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत वक्तव्य विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष  नीरज कुमार  द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करने हेतु ऐसे आयोजनों की महत्ता को रेखांकित किया।
विषय प्रवेश डॉ. रमेश सिंह ने करते हुए कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल का उद्देश्य शिक्षा नीति निर्माण को विद्यार्थी केंद्रित बनाना है। उन्होंने शिष्यत्व की परिभाषा स्पष्ट करते हुए कहा कि “जो शिष्य गुरु की मात्र इच्छा को भी आदेश मानकर उसे पूर्ण करने में तत्पर रहता है, वही उत्तम शिष्य कहलाता है।” गुरु के प्रति समर्पण के बिना शिष्यत्व प्राप्त नहीं हो सकता, यह भारतीय परंपरा की विशेषता है।
कार्यक्रम संचालन कर रहे  बैजनाथ पाण्डेय  ने अपने वक्तव्य में गुरु की महिमा का सहज उदाहरण देते हुए कहा कि “गुरु उस सड़क के समान है, जो स्वयं एक स्थान पर स्थिर रहकर अपने शिष्यों को उनके गंतव्य तक पहुँचा देती है।” मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. अनिल  सिंह, अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख, भारतीय शिक्षण मंडल एवं प्राध्यापक, काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने अपने प्रेरणादायी वक्तव्य में कहा कि अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली ने गुरु और शिष्य के बीच एक गहरी खाई उत्पन्न कर दी है। उन्होंने कहा कि “रामायण काल से लेकर महाभारत काल तक शिक्षा के स्वरूप में परिवर्तन आया, लेकिन शिक्षा का मूल उद्देश्य चरित्र निर्माण व ज्ञान प्रदान करना ही रहा।” डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि “एक शिक्षक गुरु तभी कहलाएगा जब वह अपने शिष्यों के सर्वांगीण विकास की चिंता करेगा।” उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि वे एकलव्य जैसे समर्पित शिष्य बनें और शिक्षकों को चाणक्य की भांति समाज निर्माण की भूमिका निभानी चाहिए। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित आरोग्य भारती के प्रांत कोष प्रमुख देवेश ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि “एक स्वस्थ शरीर ही ज्ञान के संचार का माध्यम होता है। जब शरीर स्वस्थ रहेगा तभी मन और मस्तिष्क में ज्ञान का संचार संभव होगा। धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक श्री सुधीर दुबे जी ने करते हुए कहा कि गुरु वह है जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि “हमारा शरीर भी कच्चे घड़े के समान है, ज्ञान और शरीर दोनों पर अभिमान नहीं करना चाहिए, बल्कि विनम्रता और सेवा का भाव बनाए रखना चाहिए।”
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रांत संगठन मंत्री श्री अशोक विश्नोई जी ने कल्याण मंत्र का  उच्चारण करते हुए कार्यक्रम को संपन्न कराया ।

About The Author

Share the News